रीवा, भास्कर हिंदी न्यूज/ जिले के चोरहटा थाना अंतर्गत नौबस्ता स्थित बाबा कैंप में सोते समय सर्पदंश से एक श्रमिक की मौत हो गई। परिवार के मुखिया की आकस्मिक मौत से परिजन आक्रोशित हो गए है। वह दो दिन से जेपी सीमेंट कंपनी के मुख्य गेट के सामने शव रख दिया है। तब से अभी तक प्रदर्शन जारी है। रिश्तेदारों की मांग है कि मृतक के घर वालों को 25 लाख रुपए मुआवजा, मकान, पेंशन और नौकरी दी जाए।
जिससे मुआवजे की राशि से दो बेटियों की शादी हो सके। वहीं इकलौते बेटे को नौकरी मिल जाए। आंदोलन कारियों का कहना है कि जब तक मुआवजा नहीं मिलेगा। तब तक लाश रखी रहेगी। बड़े बवाल की सूचना पर चोरहटा थाना और नौबस्ता चौकी का पुलिस बल मौके पर मौजूद है। वहीं हुजूर तहसील के बनकुईया सर्किल की नायब तहसीलदार विंध्या मिश्रा मौके पर पहुंची है।
मृतक सतना के जैतवारा का
मिली जानकारी के मुताबिक मृतक दुर्गेश सोंधिया पुत्र फूलचंद सोंधिया 50 वर्ष निवासी जैतवारा रेलवे स्टेशन के पास जिला सतना का रहने वाला है। वह नौबस्ता के बाबा कैंप में रहकर जेपी सीमेंट कंपनी में मजदूरी करता था। 26-27 अगस्त की रात एक बजे सोते समय बिस्तर में चढ़कर सर्प ने डस लिया। तब साथी मजदूर रीवा के संजय गांधी अस्पताल उपचार कराने सुबह 4 बजे पहुंचे।
अस्पताल में दो घंटे चली सांस
इमरजेंसी यूनिट में पहुंचे श्रमिक को चिकित्सकों ने भर्ती कर उपचार शुरू किया। इसी बीच 2 घंटे बाद 27 अगस्त की सुबह 6 बजे दुर्गेश सोंधिया की इलाज के दौरान मौत हो गई। तुरंत SGMH चौकी पुलिस ने हादसे की जानकारी परिजनों को दी। वह दोपहर तक अस्पताल पहुंचे। फिर पोस्ट मार्टम कराया। पीएम के बाद शाम 5 बजे शव को लेकर नौबस्ता पहुंचे। वहां कंपनी के गेट पर लाश रख दी।
रविवार की रात से चल रहा आंदोलन
27 अगस्त की रात 7 बजे से आंदोलन शुरू हुआ। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि मृतक के परिजनों को रहने के लिए मकान, 25 लाख मुआवजा, बेटे को नौकरी, मृतक की पत्नी को पेंशन, दो लड़कियों की शादी का खर्चा दिया जाए। इसके बाद लाश का अंतिम संस्कार करेंगे। दो दिन से चल रहे बवाल की जानकारी पर पुलिस व प्रशासन के जिम्मेदार माैके पर गए है। पर सहमति नहीं बन पाई है।
ठेकेदार का भरोसेमंद
साथी मजदूरों ने बताया कि दुर्गेश कंपनी में ठेकेदार का भरोसेमंद आदमी था। वह पहले 15 वर्ष लगातार कार्य किया। फिर चार साल दूसरे जगह पर रहा है। अब दो वर्षों से मैकेनिकल विभाग के अंडर में सीलिंग, क्रेन और रस्से आदि की जिम्मेदारी देखता था। प्लांट में मशीन को ऊपर चढ़ाना और नीचे लेकर आने का काम देखता था। अच्छे चाल चलन के चलते कंपनी के अंदर रूम मिला था।
जिला प्रशासन की नजर में प्लांट बंद, हकीकत में चालू
चर्चा है कि जेपी सीमेंट कंपनी रीवा जिला प्रशासन की नजर में बंद है। इसलिए मजदूर के मामले को लेकर सभी ने चुप्पी साध रखी है। वहीं श्रमिकों का दावा है कि हकीकत में जेपी सीमेंट कंपनी चालू है। कुछ माह पहले जेपी सीमेंट कंपनी को डालमिया सीमेंट ने खरीद लिया है। ऐसे में कंपनी ट्रांसफर की प्रक्रिया दस्तावेजों में चल रही है। प्रोडेक्शन उसी तरह चल रहा है।
17 घंटे चला आंदाेलन
नौबस्ता चौकी पुलिस का कहना है कि परिजन रविवार की दोपहर संजय गांधी अस्पताल में पोस्ट मार्टम कराए। फिर शाम 5 बजे जेपी कंपनी के मेन गेट के सामने शव लाए। वहां अपनी मांगों का ज्ञापन कंपनी को दिया। सुनवाई नहीं हुई तो रात 7 बजे धरने पर बैठ गए। प्रदर्शन दूसरे दिन सोमवार की दोपहर 12 बजे तक चला है। 17 घंटे चले आंदाेलन के बाद कंपनी ने मृतक के क्रिया कर्म के लिए 70 हजार रुपए कैश और बेटे को नौकरी का आश्वासन दिया है।
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