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Satna: सतना नगर निगम के पूर्व आयुक्त सुरेन्द्र कथूरिया सेवा से बर्खास्त, 50 लाख रुपए की रिश्वत के मामले में लोकायुक्त ने किया था ट्रैप


सतना, भास्कर हिंदी न्यूज़/ 2001 बैच के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी सुरेंद्र कुमार कथूरिया को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 3 जुलाई 2023 को आए कोर्ट के फैसले के बाद (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) से अभिमत मांगा था। जहां से सहमति मिलते ही बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया गया। 12 दिसंबर को जारी किया गया आदेश 16 दिसंबर को सामने आया है। गौरतलब है कि सतना नगर निगम में आयुक्त रहते हुए एक डॉक्टर से 50 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। उन्हें 22 लाख रुपए नकदी और सोना लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार किया था। ये वही अफसर है जिन्हें सिंहस्थ के दौरान पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने सम्मानित किया था। हालांकि बाद में ये अवॉर्ड उनसे वापस ले लिया गया था। सामान्य प्रशासन विभाग से जारी बर्खास्तगी आदेश में कहा है कि कोर्ट के फैसले के बाद सुरेंद्र कुमार कथूरिया को 10 अगस्त 2023 को सेवा से पृथक करने का फैसला किया है। इसके लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से अभिमत मांगा था। आयोग ने 17 अक्टूबर 23 को सामान्य प्रशासन विभाग के फैसले पर सहमति दे दी थी। इसके बाद अब 12 दिसंबर 2023 को जारी आदेश में कथूरिया को मप्र सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10 (नौ) के अंतर्गत सेवा से पदच्युत (पृथक) करने का आदेश जारी कर दिया है।
ये था प्रकरण
दरअसल यह मामला 26 जून 2017 का है। तत्कालीन सतना नगर निगम कमिश्नर सुरेंद्र कुमार ने सतना के ही डॉक्टर दंपत्ति से रिश्वत में 40 लाख कैश की डिमांड की। साथ सोने का मेंढक और 10 लाख का सोना भी मांगा था। डॉक्टर दंपति ने इसकी लोकायुक्त से शिकायत कर दी थी। इसके बाद 27 जून 2017 को लोकायुक्त रीवा की टीम ने शासकीय आवास से 12 लाख कैश और 10 लाख का सोना रिश्वत में लेते हुए पकड़ा था।
अवैध निर्माण नहीं तोडऩे के एवज में मांगी थी रकम
रिश्वत की यह रकम उन्होंने सतना नर्सिंग होम के संचालक डॉ. राजकुमार अग्रवाल और उनकी पत्नी डॉ. सुचित्रा अग्रवाल से नर्सिंग होम की तीसरी मंजिल के अवैध निर्माण को नहीं तोडऩे के एवज में मांगी थी। डॉ. राजकुमार अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा था कि कथूरिया ने उनसे 40 लाख कैश के साथ 10 लाख का सोना मांगा था। इतनी रकम दे पाने में उन्होंने असमर्थता जताई थी लेकिन वे कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थे। इस पर उन्होंने लोकायुक्त एसपी रीवा से इसकी शिकायत कर दी थी, और लोकायुक्त एसपी देवेश पाठक की टीम ने योजना बनाकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया था।

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