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National: IIT जोधपुर के शोधकर्ताओं ने किया कमाल, सांप के जहर से बना लिया पेप्टाइड

  1. पेप्टाइड के जरिए घावों को जल्दी भरने में मदद मिलेगी
  2. आपरेशन के बाद घाव को जल्दी ठीक करेगा यह पेप्टाइड
  3. जहरीले हिस्से को इसमें से हटाया गया

National iit jodhpur researchers made peptide from snake venom: digi desk/BHN/जोधपुर/ आईआईटी जोधपुर में शोधकर्ताओं ने एक बड़ा कमाल कर दिखाया है, इन्होंने सांप के जहर से पेप्टाइड बनाने में सफलता पाई है। उन्होंने दावा किया है कि इस पेप्टाइड से घाव को ठीक करने मदद मिलेगी। इसके साथ ही इसे कीटाणुनाशक भी बताया जा रहा है। सांप के जहर से बने इस पेप्टाइड में रोगाणुरोधी गुण बहुत ज्यादा मात्रा में हैं। खास बात यह है कि पेप्टाइड SP1V3_1 को किसी भी घाव पर कीटाणुनाशक के लिए मरहम की तरह लगा सकते हैं। इससे घावों को भरने में शीघ्र मदद मिलेगी। किसी भी आपरेशन के बाद संक्रमण को रोकने में यह सबसे कारगर बताया गया है।

जहरीले हिस्से को हटाया गया
आईआईटी जोधपुर के बायोसाइंस और बायोइंजीनियरिंग डिपार्टमेंट और स्मार्ट हेल्थकेयर विभाग के प्रोफेसर डा. सुरजीत घोष इसकी जानकारी देते हुए बताया कि रोगाणुरोधी प्रतिरोध की लगातार बढ़ती समस्या के कारण एंटीबायोटिक दवाओं के विकास में ठहराव के इस युग में रोगाणुरोधी पेप्टाइड नवीन जैवनाशक एजेंटों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए शोधकर्ताओं ने सांप के जहर के जहरीले हिस्से को हटा दिया है और पेप्टाइड को छोटा भी कर दिया गया है।

इसे आसानी से उपयोग किया जा सकेगा
प्रोफेसर घोष ने बताया कि एन-टर्मिनस पर हेलिकल शार्ट पेप्टाइड को जोड़ा गया है, ताकि जीवाणु कोशिका के अंदर हमारे द्वारा बनाए गए नए डिजाइन किए गए उपचार को आसानी से प्रवेश कराया जा सके। आईआईटी जोधपुर में किए गए इस शोध का मकसद सांप के जहर को रोगाणुरोधी गुण को बरकरार रखकर उसके विषैलेपन को कम करना रहा। इस पेप्टाइड को घाव पर कीटाणुनाशक और उपचार के लिए मरहम के तौर पर प्रणालीगत प्रशासन के लिए एक इंजेक्शन / मौखिक दवा के रूप में, या एक एरोसोलिज्ड फार्मूलेशन के रूप में चिकित्सीय रूप से आसानी से उपयोग किया जा सकेगा ।

इस तरह पेप्टाइड घाव का करेगा इलाज

प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले रोगाणुरोधी पेप्टाइड्स में कई हाइड्रोफोबिसिटी और चार्ज संरचनाएं होती हैं। इन पेप्टाइड की शक्तिशाली बैक्टीरिया नष्ट करने की क्षमता के बावजूद मानव चिकित्सीय अणुओं के रूप में उनके उपयोग को काफी हद तक सीमित करती हैं। रोगाणुरोधी पेप्टाइड अणु, SP1V3_1 की संकल्पना को डिजाइन और संश्लेषित किया है।

इसके जरिए ई. कोली और पी एरुगिनोसा, निमोनिया और एमआरएसए (मेथिसिलिन-प्रतिरोधी स्टैफिलोकोकस ऑरियस) जैसे ग्राम-पाजिटिव और ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया को नष्ट किया जा सकता है। यह पेप्टाइड मोलेक्यूल बैक्टीरियल मेम्ब्रेन्स के साथ इंटरऐक्ट करते समय एक हेलिकल संरचना का निर्माण करता है, जिससे इन बैक्टीरिया को खत्म किया जाता है।

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