Monday , June 15 2026
Breaking News

CJI सूर्यकांत का ‘हंटर’ बंगाल में, कलकत्ता HC से मांगी रिपोर्ट; क्या लाखों लोग नहीं दे पाएंगे वोट?

नई दिल्ली
 भारत में चुनाव सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है इसे जनता के अधिकारों का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है. लेकिन जब इसी प्रक्रिया पर सवाल उठने लगें, तो मामला बेहद गंभीर हो जाता है. पश्चिम बंगाल के SIR केस में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने जिस तरह सख्ती दिखाई है, उसने इस मुद्दे को और बड़ा बना दिया है. सवाल यह है कि अगर अपीलीय ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं कर रहे तो क्या हजारों-लाखों लोग अपने वोट के अधिकार से वंचित हो सकते हैं? यह चिंता सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि लोकतंत्र के मूल ढांचे से जुड़ी है। 

अब CJI की टिप्पणी और तुरंत रिपोर्ट मांगने का फैसला बेहद अहम माना जा रहा है. कलकत्ता हाई कोर्ट से आज ही स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया है. यह दिखाता है कि अदालत इस मामले को हल्के में लेने के मूड में नहीं है. चुनाव से ठीक पहले ऐसी गड़बड़ियां सामने आना कई सवाल खड़े करता है. अगर समय रहते समाधान नहीं हुआ तो इसका असर सीधे मतदान पर पड़ सकता है. यही वजह है कि अदालत ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को स्पष्ट करने की कोशिश शुरू कर दी है। 

ट्रिब्यूनल पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट सख्त
    पश्चिम बंगाल के SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने साफ कहा कि ट्रिब्यूनलों के कामकाज को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं. इसी को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से तुरंत रिपोर्ट मांगी गई है. अदालत यह जानना चाहती है कि क्या वास्तव में आदेशों की अनदेखी हो रही है और क्या नागरिकों को न्याय पाने में दिक्कत हो रही है। 

    वरिष्ठ वकील देवदत्त कामत ने कोर्ट में दलील दी कि अपीलीय ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि केवल ऑनलाइन आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं. लोगों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने की अनुमति नहीं दी जा रही. यहां तक कि वकीलों को भी पक्ष रखने का मौका नहीं मिल रहा. उन्होंने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, जो एक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। 

    कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई और कहा कि इस मामले में हर दिन नए मुद्दे सामने आ रहे हैं. यही वजह है कि अब हाईकोर्ट से सीधे रिपोर्ट लेकर स्थिति साफ करने का फैसला लिया गया है. अदालत का यह कदम इस बात का संकेत है कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो आगे और सख्त कार्रवाई हो सकती है। 

SIR मामला क्या है और विवाद क्यों बढ़ा?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन एक प्रक्रिया है, इसमें चुनाव से पहले मतदाता सूची की समीक्षा की जाती है. इसमें नाम जोड़ने और हटाने का काम होता है. विवाद तब बढ़ा जब आरोप लगा कि कई लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं और अपील के लिए बने ट्रिब्यूनल ठीक से काम नहीं कर रहे. इससे हजारों लोगों के वोट देने का अधिकार प्रभावित हो सकता है। 

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि उसके आदेशों का पालन होना जरूरी है. अदालत ने कहा कि जिन लोगों की अपील मतदान से दो दिन पहले तक स्वीकार हो जाती है, उन्हें वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए. साथ ही कोर्ट ने ट्रिब्यूनलों के कामकाज पर रिपोर्ट मांगी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं प्रक्रिया में गड़बड़ी तो नहीं हो रही। 

क्या सच में लोग वोट देने से वंचित हो सकते हैं?
अगर ट्रिब्यूनल सही से काम नहीं करते और अपील समय पर नहीं सुनी जाती, तो यह संभावना बन सकती है. कई लोग अपने अधिकार से वंचित हो सकते हैं. यही वजह है कि अदालत ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और तुरंत हस्तक्षेप किया है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। 

आगे क्या हो सकता है?
अब सबकी नजर कलकत्ता हाईकोर्ट की रिपोर्ट पर टिकी है. अगर रिपोर्ट में गड़बड़ी सामने आती है, तो सुप्रीम कोर्ट कड़े निर्देश जारी कर सकता है. इससे ट्रिब्यूनलों की कार्यप्रणाली में बदलाव हो सकता है. चुनाव से पहले यह मामला और भी अहम हो गया है, क्योंकि इसका सीधा असर मतदाताओं के अधिकार पर पड़ता है. अदालत का यह रुख साफ करता है कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

About rishi pandit

Check Also

भारत-फ्रांस साझेदारी मजबूत, पीएम मोदी ने ‘भारत इनोवेट्स’ लॉन्च को बताया नवाचार का नया मंच

नई दिल्ली फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ भारत इनोवेट्स के लॉन्च कार्यक्रम को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *