Maha Shivratri 2022: digi desk/BHN/उज्जैन/ हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का बहुत महत्व है। शिव भक्त को पूरे साल इसका इंतजार
रहता है। इस दिन शिव मंदिरों में पूजा और अभिषेक होता है। खास मंदिरों में इस उत्सव की खास धूम रहती है। इसे देखने और भगवान शंकर के दर्शन करने के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। इन्हीं में से एक उज्जैन का महाकाल मंदिर है। भोलेनाथ और माता पर्वती के विवाह का पर्व महाशिवरात्रि यहां बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। महाशिवरात्रि से पहले ही यहां कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं।
9 दिन मनाते हैं शिवनवरात्रि
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि से 9 दिन पहले ही उत्सव शुरू हो जाता है। यहां नौ दिनों तक शिव नवरात्रि मनाई जाती है। इस वर्ष 1 मार्च को महाशिवरात्रि है। 21 फरवरी से शिवनवरात्रि का त्योहार शुरू हो गया है। खास बात यह है कि शिव नवरात्रि का आयोजन पूरे देश में सिर्फ उज्जैन में होता है।
9 रूपों में होता है ज्योतिर्लिंग का श्रृंगार
शिवनवरात्रि के दौरान महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में 9 दिनों तक भक्तों को प्रवेश नहीं दिया जाता है। सिर्फ मंदिर के पुजारी ही पूजा करते हैं। नौ दिनों तक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग को 9 अलग-अलग रूपों में सजाया जाता है। पहले दिन श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का श्रृंगार भांग, सूखे मेवे, फल-फूल और रेशमी वस्त्रों से किया जाता है। दूसरे दिन श्री शेषनाग श्रृंगार, तीसरे दिन घटाटोप श्रृंगार, चौथे दिन श्री छबीना श्रृंगार, पांचवे दिन श्री होलकर श्रृंगार, छठवें दिन श्री मनमहेश श्रृंगार, सातवें दिन श्री उमामहेश श्रृंगार, आठवें दिन श्री शिवतांडव श्रृंगार, और नौवें दिन पूरे गर्भगृह को फूलों से सजाया जाता है। साथ ही भगवान शिवजी का विवाहोत्सव मनाया जाता है।
10वां दिन होता है खास
महाशिवरात्रि के दिन शिव-पार्वती विवाह समारोह की परंपरा निभाने के बाद भगवान का श्री सेहरा श्रृंगार किया जाता है। जिसमें सवामन पुष्पों से सेहरा बनाकर भोलेनाथ को पहनाया जाता है। इस दिन भस्मा आरती ब्रहमुहूर्त में ना होकर विशेष मुहूर्त में दोपहर के समय की जाती है।
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