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MP Election: MP भाजपा प्रभारी भूपेंद्र यादव व सह प्रभारी अश्विनी वैष्णव ने की दो दौर की बैठक, नेताओं से लिया फीडबैक

Madhya pradesh bhopal mp election 2023 mp bjp incharge bhupendra yadav and co incharge ashwini vaishnav held two rounds of meeting: digi desk/BHN/भोपाल/मध्‍य प्रदेश में नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की दिशा क्या होगी, मुद्दे क्या होंगे, नारे क्या होंगे, पार्टी इसकी तैयारी में जुट गई है। प्रदेश चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव और सह प्रभारी अश्विनी वैष्णव ने दो दिनों तक मीडिया, इंटरनेट मीडिया और अन्य विभागों के साथ बैठक कर मध्य प्रदेश के राजनीतिक माहौल को समझा है।

अमित शाह के साथ तय होगी अगली रणनीति

अब वे दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ अगली रणनीति तय करके 19 जुलाई को फिर भोपाल आएंगे। पार्टी नेताओं द्वारा संभावना जताई जा रही है कि अगली बैठक में वे चुनाव के राजनीतिक मुद्दे तय कर देंगे, यानी चुनाव की थीम पर अंतिम निर्णय ले लिया जाएगा।

नेताओं और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लिया

केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश पर भूपेंद्र यादव और अश्विनी वैष्णव ने भोपाल में दो दौर की बैठक के दौरान पदाधिकारियों से लेकर कई नेताओं और कार्यकर्ताओं तक से फीडबैक लिया, लेकिन परिणामसूचक कोई बात सामने नहीं आई।

अब दिल्‍ली की अनुमति का इंतजार

पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह लग रहा है कि अब फैसले के लिए दिल्ली की अनुमति का इंतजार है। उधर, चुनाव प्रबंधन से जुड़े नेताओं को भी चुनाव प्रबंधन कमेटी के संयोजक बनाए गए नरेंद्र सिंह तोमर की टीम का भी इंतजार है। वजह पिछले चुनावों में अपनाई गई कार्यशैली है।

2003 से 2013 तक के चुनाव में प्रबंधन का सारा काम स्व. अनिल दवे और उनके साथ स्व. विजेश लूनावत और टीम देखा करती थी। 2018 के चुनाव से पहले दवे का निधन हो गया। कोविड महामारी के दौरान लूनावत भी नहीं रहे।

चुनाव प्रबंधन में माहिर नेताओं की कमी

यह पहला अवसर है, जब चुनाव प्रबंधन में माहिर नेताओं की कमी महसूस की जा रही है। पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रभात झा का भी सहयोग अधिकतर चुनाव में प्रबंधन के काम में लिया जाता था, लेकिन लंबे समय से वे भी हाशिए पर हैं।

अध‍िकांश कार्यक्रम सक्रिय नहीं

दरअसल, जिला स्तर पर पीढ़ी परिवर्तन के कारण बड़ी संख्या में ऐसे कार्यकर्ता हैं, जो काम न होने से सक्रिय नहीं हैं। पार्टी का सोच है कि इन्हें प्रदेश के सभी 57 जिलों की चुनाव समितियों में समायोजित कर लिया जाए। दो दिनों की बैठक में हर जिले के लिए चुनाव प्रभारी, सह प्रभारी और अन्य समितियों के प्रभारियों के नामों पर विचार किया गया है।

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