Krishna Janmashtami : digi desk/BHN/ इस वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त को देशभर में धूमधाम से मनाई जाएगी। यह पर्व हर साल भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। आज हम आपको भगवान श्रीकृष्ण के उन पांच स्थानों के बारे में बताने जा रहे हैं। जहां प्रभु कण-कण में समाएं हुए हैं। यह स्थल आज भी गोपाल की लीलाओं का वर्णन करता है। अगर आप कृष्ण की लीलाओं का अनुभव करना चाहते हैं तो ब्रजभूमि जरूर जाएं। यहां महसूस होता है कि भगवान आसपास कहीं हैं। आइए जानते हैं इन पवित्र स्थानों के बारे में।
1.यमुना
मान्यताओं के अनुसार तीर्थराज प्रयाग यमुना के घाटों पर श्रीयमुना महारानी की देखरेख में कान्हा की पूजा करते हैं। भगवान के जन्म के बाद उनके पिता वासुदेव यमुना से होकर गोकुल गए थे। तब यमुना ने श्रीकृष्ण के चरण छूए थे। वहीं यमुना के आसपास भगवान ने कई लीलाओं का जिक्र शास्त्रों में है। कहां जाता है कि यमुना में स्नान करने से जातकों के सभी पाप दूर होते हैं।
2.गोवर्धन
श्रीकृष्ण के महत्व को जानने के लिए गोवर्धन की परिक्रमा एक बार जरूर करना चाहिए। यहां भगवान के बारे में हर छोटी-छोटी जानकारी मिल जाएगी। गोवर्धन में हमेशा भक्तिमय का माहौल रहता है। यहां कृष्ण कुंड और राधा कुंड की परिक्रमा की जाती है।
3.नंदरायजी मंदिर
पहले यहां नंदरायजी का घर हुआ करता था। वहां आज मंदिर है। यहां आपको बाल गोपाल के बारे में जानना को मिलेगा। भगवान कृष्ण ने पूरा बचपन यहीं बिताया था।
4.निधिवन
कहा जाता है कि यहां कृष्ण ने रासलीला रचाई थीं। इस वन में एक मंदिर भी है, जिसमें प्रतिदिन कान्हा के लिए सजावट की जाती है। मान्यताओं के अनुसार यहां रोजाना कृष्ण और राधा विश्राम करते हैं। मंदिर का सुबह दरवाजा खुलता है, तो दातुन गिली मिलती है व बिस्तर फैला रहता है। निधिवन में कोई भी व्यक्ति और जानवर रात को नहीं रुकता है।
5.काम्यवन
मथुरा से 50 किमी दूर काम्यवन है। यहां एक पहाड़ी है, जहां एक थाल और कटोरी का चिन्ह बना हुआ है। शास्त्रों के अनुसार यहां कृष्ण ने व्योमासुर असुर का वध किया था। वहीं भगवान परशुराम ने यहां तपस्या भी की थी। पांडवों ने भी यहां कुछ समय बिताया है।
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