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Deepawali 2022: दीपावली पूजन के बाद ब्रह्म मुहूर्त से लगेगा सूर्य ग्रहण

After deepawali worship therewill-be a solar-eclipse from brahma muhurta: digi desk/BHN/रायपुर/आधी रात तक दीपावली पूजन के पश्चात सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही सूतक लग जाएगा। शंकराचार्य आश्रम के प्रमुख ब्रह्मचारी डा.इंदुभवानंद महाराज के अनुसार मंगलवार को स्वाति नक्षत्र पर तुला राशि पर ग्रस्तास्त खंडग्रास सूर्यग्रहण लग रहा है। ग्रहण शाम 4.23 बजे स्पर्श करेगा और ग्रहण का मध्य काल 5.28 बजे तथा ग्रहण का मोक्ष सायं 6.25 बजे होगा। ग्रहण की अवधि 2 घंटा 2 मिनट होगी। ग्रहण लगने से पूर्व सुबह 4.23 बजे से सूतक लगेगा। इस दौरान मंदिर के पट बंद रहेंगे।

अगले दिन भोजन

ऐसी मान्यता है कि ग्रहण काल में भोजन नहीं करना चाहिए। चूंकि ग्रहण शाम को समाप्त हो रहा है और सूर्य अस्त होने से रात्रि काल में भोजन नहीं कर सकेंगे। अगले दिन सुबह सूर्य दर्शन के बाद ही भोजन ग्रहण किया जाएगा। सूतक काल में मूर्ति स्पर्श, भोजन, शयन नहीं करना चाहिए। अनिष्ट शांति के लिए हवन, जप, दान, तुला दान, अन्न, वस्त्र का दान सोने-चांदी का सर्प बनाकर तांबे के पात्र में रखकर दान करना चाहिए।

पूजा में रखें सामग्री

ज्योतिषाचार्य डा.दत्तात्रेय होस्केरे के अनुसार 24 अक्टूबर को हस्त नक्षत्र में शनि, गुरु, बुध और शुक्र के स्वग्रही रहते दीपावली मनाई जाएगी। गोचर में नीच भंग राजयोग तथा लगभग 100 वर्ष बार तुला राशि में चार ग्रहों सूर्य, चंद्र, केतु और शुक्र का योग बन रहा है। इस योग में पूजन से रोग, शोक से मुक्ति मिलेगी।

स्थिर लग्न के मुहूर्त

  • गोधुली बेला- सायंकाल 4.41 से 6.17 बजे तक
  • वृषभ लग्न- सायंकाल 6.47 से 8.46 बजे तक- पारिवारिक और आर्थिक लाभ के लिए
  • मिथुन लग्न- रात्रि 8.46 से 10.59 बजे तक- विवाह के लिए
  • कर्क लग्न- रात्रि 10.59 से 1.13 बजे तक – विद्यार्थियों के लिए
  • सिंह लग्न- मध्य रात्रि 1.13 बजे से 3.24 बजे तक- व्यापारियों के लिए

चौघड़िया के मुहूर्त

  • शुभ- प्रात: 8.56 बजे से 10.22 बजे
  • अमृत- सायंकाल 4.05 बजे से 5.31 बजे तक
  • चर- सायंकाल 5.31 बजे से 7.05 बजे तक
  • लाभ- रात्रि 10.14 बजे से 11.48 बजे तक

पूजन के लिए सामग्री

चौकी को गंगाजल से शुद्ध कर लाल, पीला वस्त्र बिछाकर चावल, आटा से स्वास्तिक बनाएं। श्रीगणेश, लक्ष्मी की प्रतिमा रखें। अक्षत से अष्टदल कमल बनाएं। कर्पूर, चौमुखी दीपक, घी, घंटी, पूजा की थाली, शक्कर, दूध, दही, शहद, गंगाजल, रोली, रक्त चंदन, कुमकुम, हल्दी, लाल, पीला पुष्प, कमल पुष्प, पंच पल्लव, पान पत्ता, वस्त्र, मौली, कलावा, जनेऊ, चुनरी, गंध, श्रृंगार, अबीर, गुलाल, मेहंदी, धूप, अगरबत्ती, मुखवास के पान, लौंग, सुपारी, इलायची, चांदी का सिक्का, सात धान्य, पांच फल, खील, बताशा, सूखा मेवा, व्यंजन, मिठाई, दक्षिणा, नारियल, कलश, हल्दी की गांठ, आमपत्ता, मिट्टी का दीप।

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