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Satna: आश्चर्य: जगन्नाथ मंदिर में गिरी बिजली मूर्तियां सुरक्षित गुंबद की छत में होल और इन्वर्टर उड़ा

  • मुख्य मंदिर में 100 मीटर दूर पर स्थित कुछ मूर्तियों को नुकसान पहुंचा
  • दो साल में दूसरी बार गिरी आकाशीय बिजली

सतना,भास्कर हिंदी न्यूज़/ जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर स्थापित ताला का जगन्नाथ स्वामी मंदिर शुक्रवार को आश्चर्यजनक घटना को लेकर चर्चा में आ गया। यहां मंदिर की छत पर आकाशीय बिजली गिरी इस दौरान गुम्बद पर होल हो गया और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उड़ गए। मगर ,मंदिर में मौजूद मूर्तियों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मंदिर से 100 मीटर की दूरी पर स्थापित कुछ अन्य मूर्ति और दिवाल क्षतिग्रस्त हो गए। इस घटना के बाद लोगों का मानना है कि जगन्नाथ स्वामी ने अद्भुत चमत्कार किया है और ग्रामीणों की रक्षा के लिए प्राकृतिक आपदा को अपने ऊपर ले लिया है।

बताया जाता है कि ताला मुकुंदपुर क्षेत्र में इस मंदिर की स्थापना राजवंशों के द्वारा सोलहवीं शताब्दी में की गई थी। मंदिर में भगवान कृष्ण उनके भ्राता बलदाऊ और बहन सुभद्रा की मूर्ति स्थापित है। हर साल इस मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं ।स्थानीय लोगों के मंदिर पर अगाध आस्था है। बताया जाता है कि गुरुवार शुक्रवार की रात 2 बजे मौसम खराब हुआ और वर्षा का दौर शुरू हुआ। इसी बीच आकाशीय बिजली गिरी। जोरदार आवाज के साथ बिजली मंदिर की छत से टकराई इस दौरान गुंबद में करीब आधा फिट चौड़ा होल हो गया इसके बाद बिजली कहां गई किसी को कुछ पता नहीं है। इस घटना के बाद से पुजारी और ग्रामीण हैरान है कि जब मंदिर में बिजली गिरी तो मूर्तियों को नुकसान क्यों नहीं पहुंचा। उसकी क्या वजह हो सकती है। हालांकि लोग इसे भगवान कृष्ण का चमत्कार मानते हैं उनका कहना है कि जिस प्रकार से इंद्र के प्रकोप से रक्षा के लिए श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपने उंगलियों में उठा लिया था। वैसे ही ग्राम वासियों की आकाशीय बिजली से रक्षा के लिए भगवान कृष्ण ने बिजली को अपने आप में समाहित कर लिया।

पुरी से लाई गई थी मूर्ति

जगन्नाथ पुरी में जिस प्रकार से भगवान श्री कृष्ण, बलदाऊ और बहन सुभद्रा की मूर्ति स्थापित है ठीक वैसी ही मूर्ति मुकुंदपुर के जगन्नाथ स्वामी मंदिर में भी 16वीं शताब्दी में .महाराजा द्वारा स्थापित की गई थी। तब मंदिर की पूजा पाठ का जिम्मा राज परिवारों के पास था। लेकिन जब व्यवस्था में बदलाव हुआ तो पिछले 70 सालों से मंदिर का संचालन यहां की प्रबंध समिति कर रही है। मंदिर के पुजारी मिजाजी लाल तिवारी ने शुक्रवार को हुई घटना को लेकर कहा कि यह भगवान की विशेष कृपा है, लोगों की घात टल गई।

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